जिला - बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)
विषय - ढलैत
विधा - छंद मुक्त काव्य
शीर्षक - ढाल हमेशा रखना है
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// ढाल हमेशा रखना है //
ज्ञान और शिक्षा की ,
ढाल होना चाहिए ।
अज्ञानता से लड़ने को ,
ढलैत बनना चाहिए ।।
झूठ कपट छल निंदादि ,
बुराइयों से लड़ना है ।
सत्य प्रेम सात्विकता का ,
ढाल हमेशा रखना है ।।
काम क्रोध लालच हिंसादि ,
शत्रुओं से भिड़ना है ।
ढलैत सिपाही बन करके ,
अपने से दूर खदेड़ना है ।।
दुःख परेशानी समस्याएँ ,
कभी नहीं टिक पाएँगे ।
साहस और संयम की ढाल ,
रक्षा कवच बनाएँगे ।।
आत्मविश्वास की ढाल से ,
चुनौतियाँ डर जाएगी ।
जीवन में आगे बढ़ो ,
सफलता का ध्वज लहराएगी ।।
मेहनत और लगन की ढाल ,
छप्पन इंच का सीना ।
सदाचार की बरछी भाला ,
जग में सुख से जीना ।।
जीवन में योद्धा बनकर ,
संघर्ष हमें करना है ।
धर्म नीति मर्यादा का ,
ढाल - कृपाण रखना है ।।
प्रभु भक्ति हरि नाम की ,
दिव्य ढाल से रहो सुरक्षित ।
पाप दोष नरकों के भय से ,
हो जाओगे पूर्णतः वंचित ।।
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