जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-पलाश
विधा-कविता (मुक्त छंद)
गांव के पेड़ों में यूं
धधक रहा पलाश।
लगता यूं होले से,
फैल रही है अाग।
मदमाती बासंती
बयार में बौराये
खट्टे-मीठे रसीले
वो लगड़े आम।
इठलाते कचनार
चमेली अमलतास
सेमल ,टेशु शांत
सूर्ख लाल पलाश।
फागुन के गीतों में
गुलाल के रंगो में
इठला रहा झूंडों में
धधक रहा पलाश।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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