Thursday, March 18, 2021

नलिनी बाजपेयी की रचना- बसाहट

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
    संबलपुर,जिला-कांकेर, (छ. ग.) 
         विषय-बसाहट,
*~~~~~~~~~~~~~~~~*
               *बसाहट*

पहाड़ों की तराईयों में 
बसा मेरा शहर,
मखमली वादियों में 
बसा मेरा शहर।

ऊँचे पहाड़ों की 
वादियों की शान है,
इसकी विरल *बसाहट* ही 
मेरी पहचान है।

आस्था को समेटे लोग 
मेरी पीड़ा से अंजान हैं ,
ठंड में चले आते पहाड़ों से 
नीचे बचाने जान हैं।

बड़ी कठिन जिंदगी है, 
संघर्ष भरा परिवेश,
नीले अंबरों के नीचे 
बसा है यह प्रदेश ।

ये खूबसूरत वादियां 
ये अंबर ,ये घटाएं,
झरनों का इठलाता सौन्दर्य 
अद्भुत छटा दिखाएं।

यहाँ की  *बसाहट* की खुशबू 
फिजाओं में मशहूर,
इन हसीन वादियों में 
रहती है जन्नत की हूर।

पहाड़ों पर छोटा सा भूभाग 
में लहराती जब फसल,
उगते सूर्य के ताप को 
तरसती यहां की नसल ।

गुनगुनाती धूप यादों के
लिए काफिलों के संग,
बलखाती,खिलखिलाती 
*बसाहट* के मन में भरता उमंग।

       नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)

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