जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-व्रीहि
विधा-कविता (मुक्त छंद)
अक्षत से देवों को लगता भोग,
इससे बने खीर खाते हैं लोग।
तंदुल के रुप में सबको भाता,
सर्व वर्ग चाव से इसे है खाता।
छग में इसकी है कई प्रजाति,
छग तो धान कटोरा कहलाता ।
दूबराज,जवांफूल व गुरमटिया,
छग के खेतों में है लहलहाता।
चाँवल छग का मुख्य आहार,
भात,व्रीहि से पहचाना जाता ।
इससे छग इथेनाल बनायेगा,
पेट्रोल का दाम कम हो जायेगा
आओं व्रीहि की कीमत पहचाने ,
सुनहरी बालियां खेतों में उगायें।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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