Thursday, March 18, 2021

उर्मिला सिदार की रचना- बसाहट

रचनाकार -उर्मिला सिदार
 ग्राम- बुलाँंकी 
जिला- रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
विधा -कविता 
विषय -बसाहट
दिनाँक-18/03/2021
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             *बसाहट*
अपनी नजरों में बसाहट बना लीजिए।
दो पल की खुशी जिंदगी जी लीजिए।
न्याय ,धर्म ,सत्य को आत्मा में बसा लीजिए।
प्रिय, हित ,लाभ पर नियंत्रण कर लीजिए।
समाधान ,समृद्धि ,अभयता से जी लीजिए।
मानवीयता  को मन में बसा लीजिए।
अमानवीयता को सही कर लीजिए।
न्याय प्रवृत्ति में हर पल जी लीजिए।
आशक्ति दुनियाँ से दूर रहा कीजिए।
स्वभाव की बसाहट रूह में बना लीजिए।
स्वार्थ का त्याग ,परमार्थी पर ध्यान दीजिए।
उपकार भाव में जीते हुए उपकारी बनिए।
अपने नजरों में दया भाव का भाव बसा लीजिए।
करुणा भाव से सभी का परोपकार कीजिए।
भूतकाल की पीड़ा को भूल जाइए।
वर्तमान में जीने की हौसला बुलंद कीजिए।
अपने नजरों में बसाहट बना लीजिए।
 दो पल की खुशी जिंदगी जी लीजिए।
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 उर्मिला सिदार रायगढ़ छत्तीसगढ़

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