जिला-कांकेर,छग
शीर्षक- बसाहट
विधा- कविता (मुक्त छंद)
अब गांवों को छोड़ कर लोग
शहरों में ही बसने लगे हैं ।
ग्रामीण परिवेश पसंद नहीं,
परिवार ही छटने लगे हैं ।
कैसे कहें कि शहर की उन्हें
हवा लग गई है लुभाने।
गांव की जनसंख्या हर दिन,
कम हो रहे घटने लगे हैं ।
बसाहट थी गांवों की रौनक
पथ निर्जन लगने लगे हैं ।
अपनी धरती से पलायन कर,
लोग बेगाने लगने लगे हैं ।।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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