Saturday, March 20, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- चंदन

नाम---- गिरधारी लाल चौहान
स्थान--- नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा ---आलेख /कविता/ ग़ज़ल
विषय ,---चंदन
शीर्षक  ---जीवन चंदन जीवन वंदन

अमीरी में देखो चंदन ही चंदन
गरीबी में देखो क्रंदन ही क्रंदन
एक अंधियारा एक उजियारा ।
शरीफी में देखो सज्जन ही सज्जन ।

शीतलता का इसमें गुण है भरा ।
गर्मी खोजोगे पाओगे न जरा ।
दुर्जन का इस पर कोई न असर  ।
सजे माथ मिलते नमन ही नमन ।

मानव भी चंदन से सीख ले ।
वैसा ही अपना  जीवन बदले ।
दूरी बनाले  सारे अवगुणों से ।
ये जीवन ही है दर्शन ही दर्शन ।

खुद को देखना है कर्मों से देख ।
खुद को समझना है धर्मों से समझ ।
खुद को परखना है दान से परख ।
फिर जीवन में  दर्पन ही दर्पन ।

मानव नहीं उसके आचार पूजे जाते हैं ।
मानव नहीं व्यवहार काम आते हैं ।
सादगी से परिपूर्ण हो जीवन ।
समझना चाहिए बिना कंचन ही कंचन ।

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