स्थान--- नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा ---आलेख /कविता/ ग़ज़ल
विषय ,---चंदन
शीर्षक ---जीवन चंदन जीवन वंदन
अमीरी में देखो चंदन ही चंदन
गरीबी में देखो क्रंदन ही क्रंदन
एक अंधियारा एक उजियारा ।
शरीफी में देखो सज्जन ही सज्जन ।
शीतलता का इसमें गुण है भरा ।
गर्मी खोजोगे पाओगे न जरा ।
दुर्जन का इस पर कोई न असर ।
सजे माथ मिलते नमन ही नमन ।
मानव भी चंदन से सीख ले ।
वैसा ही अपना जीवन बदले ।
दूरी बनाले सारे अवगुणों से ।
ये जीवन ही है दर्शन ही दर्शन ।
खुद को देखना है कर्मों से देख ।
खुद को समझना है धर्मों से समझ ।
खुद को परखना है दान से परख ।
फिर जीवन में दर्पन ही दर्पन ।
मानव नहीं उसके आचार पूजे जाते हैं ।
मानव नहीं व्यवहार काम आते हैं ।
सादगी से परिपूर्ण हो जीवन ।
समझना चाहिए बिना कंचन ही कंचन ।
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