जिला - बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)
विषय - चंदन
विधा - छंद मुक्त काव्य
शीर्षक - भारत की माटी चंदन है
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// भारत की माटी चंदन है //
मेरे भारत की माटी चंदन है ,
नमन करूँ मैं बारम्बार ।
जहाँ प्रभु अवतार लिए ,
महिमा अनन्त अपार ।।
राम कृष्ण देवों की भूमि ,
चंदन से भी बढ़कर है ।
प्रभु की लीला धाम धरा ,
कण - कण पावन सुखकर है ।
जहाँ ऋषि मुनि संत महात्मा ,
सती साध्वी होती हैं ।
पुण्य सलिला गंगा मैया ,
पाप ताप को धोती हैं ।।
गौरवशाली संस्कृति है ,
इतिहास अति प्राचीन ।
शस्य श्यामला तीर्थ भूमि ,
भारत भव्य प्रवीण ।।
सत्य सनातन धर्म की
ज्ञान विश्व को बाँटे ।
चंदन जैसी कीमती सुगंधित ,
मानवता को छाँटे ।।
भारत माता की जय हो ,
मैं हूँ माँ का लाल ।
चंदन तिलक छाप न छोड़ूँ ,
ऊँचा कर दूँ माँ का भाल ।।
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