जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-चंदन
विधा-कविता( मुक्त छंद)
उस चंदन के
सुगंध -सी
महक लिए
सद्गुणों की।
कर्मपथ पर
अडिग रहें,
चाहे विषधर
लिपटे तन में ।
कटना पड़े तब
या जलना पड़े
तब भी न डिगे
पग कभी कहीं।
घिस कर हम
भारत माँ के
भाल का चंदन
बनकर महकें।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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