Monday, March 22, 2021

नलिनी बाजपेयी की रचना- संकल्प

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
   संबलपुर,जिला-कांकेर,( छ.ग.)
       विषय-संकल्प,
           दिनाँक-22.03.21
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             *संकल्प*

जीवन में गर कुछ बनना हो, 
इतिहास गर नवल गढ़ना हो।
देश राष्ट्र के लिए कुछ करना हो, 
मानवता के लिए अगर मरना हो। 

मन विचलित तुम कभी ना करना, 
बाधाओं से अब कभी ना डरना।     
लक्ष्य भेद गर तुमको करना हो, 
नव संकल्पों को धारण करना ।

राहें उलझ जाएं 
तब सीना तान रखना,
संकल्पों से तुम 
नित आगे बढ़ना।

मुश्किल आएंगी 
तुम्हें उलझाएंगी 
राह रोक तुम्हें 
जरूर भटकाएंगी।

अवनति का पथ 
तमस दिखलाएंगी ,
दृढ़ निश्चय रखोगे तो 
मंजिल खुद चलकर आएगी ।

जीवन में विकल्पों का 
जब द्वार खुल जाएं,
तब तुम दृढ़ संकल्पों से 
इतिहास बनाओगे।

      नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)

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