जिला/राज्य - जांजगीर चाम्पा (छ ग)
विषय - संकल्प
चट्टानों जैसा दृण हो संकल्प,
जो पलट कर रख दे कायाकल्प।
बिना संकल्प न होय, होम हवन,
बिना संकल्प लिये न महके धरती गगन।
तूफानों सा दुनिया को बदलने का ले संकल्प,
तेरे सामने आए हर चुनौतियों का मिल जाएगा विकल्प।
दृण संकल्प लिए तू कुछ कर गुजर,
मिलेगी मंजिल तुझे हर मोड़ पर।
लिए संकल्प सेना ने दी अपनी कुर्बानी,
संकल्प पूरा करने के लिए मिट गई "झाँसी की रानी"।
हो संकल्प ऐसा हमारा, देश के लिए कुर्बान हो जाए,
कुछ ऐसा कर गुजरे की शहीदों में भी अपना नाम हो जाए।।
Bahot sunder
ReplyDeleteबहूत सुंदर कविता
ReplyDeleteVery good
ReplyDeleteVery good mam
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