Tuesday, March 2, 2021

श्रीमती ज्योति माला सिन्हा की रचना- पलाश

रचियता - श्रीमती ज्योति माला सिन्हा
स्थान -मनेंद्रगढ
जिला - कोरिया
शीर्षक -पलाश


हरित वर्ण किसलय को
देख , कर रही हूं तलाश
यहीं कहीं था वो 
केसरी रंग वाला पलाश

जिसके फूलों को देखकर
मचलता था मन  
बनाने के लिए पक्का रंग
रंगने दोस्तो को होली में
करते थे तरह तरह के योजन
ऐसी खुशी नहीं दिखती
क्योंकि अब पहले जैसे  
नहीं रह गए लोग आस पास
यहीं कहीं था वो
केसरी रंग वाला पलाश।

कभी हर गली मोहल्ले की 
पहचान हुआ करते थे
बच्चे भी जिसके पत्तो को 
जान लिया करते थे।
शहरी क्षेत्रों से हो गया 
इन वृक्षों का उन्मूलन
 कुछ गांवो में, कानन में 
ही दिखते हैं पलाश
नही रह गया यहां वो
केशरी रंग वाला पलाश

अब कम दिखते हैं 
 पत्तल वाले भी
जिनके जीविका का
 उपार्जन हुआ करते थे 
नहीं बना पाते अब 
पहले जैसे ढेर सारे बंडल
क्योंकि ढूंढना पड़ता है पलाश।
यहीं कहीं था वो 
केशरी रंग वाला पलाश।।

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