स्थान ---नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला --जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा---आलेख /कविता /ग़ज़ल
विषय--- पलाश
शीर्षक ---पलाश
प्रकृति ने पलाश को महक नहीं दिया ।
मैं कहता हूं उसके प्रति न्याय नहीं किया ।
धरा हो या गगन में आग जैसा जो दिखे ।
विधी उसकी तकदीर को इस तरह लिखे ।
सोचो फिर भी सिर उठा कैसे जीवन जीया ।
औरों की तरह उसमें भी महक हो जाना था ।
आज जैसा युग हम जीते बहस हो जाना था ।
मौन वह धूप चट्टान में खड़े कैसे सह लिया ।
प्रशंसा के सहारे कब तक जीया जा सकता ।
और भी तो बातें हैं कई जो लिया जा सकता ।
सिर्फ वन की शोभा बढ़ाने को उसे कह दिया ।
कई नामों से जाना जाता वह इस जहान में ।
पलाश ढाक टेसू जंगल की आग तोते की चोच ।
उसकी सुंदरता ने उसके कई नाम रख दिया ।
कवि भी उस पर कविता लिखकर खुश हो जाता ।
क्या है पलाश के मन में कोई तलाश नहीं पाता ।
इतना जरुर है जो है सो है अपना जीवन जीया ।
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