रचनाकार _श्रीमती पद्मा साहू "पर्वणी" खैरागढ़
जिला__ राजनांदगांव छत्तीसगढ़
विषय _ _पलाश
विधा___ दोहा छंद
ऋतु बसंत में ही खिले, पीले लाल पलाश।
स्वर्ण बौर तरु आम्र से, सुरभित भू आकाश।।१
अद्भुत टेसू फूल को, कहते वन की आग।
लदे वृक्ष शुचि फूल से, मधुर सुनाते राग।।२
परसा टेसू ढाक है, है पलाश ही छूल।
औषधि से परिपूर्ण है, पात तना जड़ फूल।।३
ताजे फूल पलाश के, नैसर्गिक है रंग।
प्रेम रंग में रंगकर , खेलें होली संग।।४
दूर रतौंधी रोग को, करता मूल पलाश ।
करे दूर नकसीर को, ढाक पुष्प बन खास।।५
है पलाश की छाल भी, गुणकारी भरपूर।
पाचन संबंधी उदर , रोग करे सब दूर।।६
ऋतु बसंत आगाज दे, हिय में नव उल्लास।
कहे सदा ही पर्वणी, अनुपम लगे पलाश।।७

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