महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक- फागुन म मोर मन...
विधा-गीत
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मया अउ पीरीत के करार होगे।
फागुन म मोर मन मतवार होगे।।
मन हा सबो के हरियागे,
जम्मों झन हा भंगियागे।
अपने अपन हाँसय रोवय,
नाचत गावत फागुन आगे।।
रंग म रंगे घर दुवार होगे,फागुन म मोर.......
बबा पहिरे हावय लुगरा,
बाबू घुमत हावय उघरा।
जम्मों दिखय खदभुसरा,
ममादाई मटकय मुड़उघरा।।
पिचका के रंग धारेधार होगे, फागुन म मोर.....
आनी बानी मुंहूँ ल बनाए,
बाला टोपी चसमा लगाए।
राहस नाचय लुगरा पहिरे,
फगवा गावय रंग उड़ाए।।
नंगारा बजई हा बेहार होगे, फागुन म मोर.......
जिनगी हावय चारदिनिया,
तोर डेरा हावय घरघुंदिया।
दया मया के धर ले मोटरा,
दुख सुख रात अउ बिहनिया।।
जाँगर जिनगी के अधार होगे,फागुन म मोर …..
मया अउ पीरीत के करार होगे।
फागुन म मोर मन मतवार होगे।।
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