Wednesday, March 17, 2021

श्रीमती रजनी शर्मा बस्तरिया की रचना- फागुन

दिनांक।       १७ मार्च
रचनाकार।     श्रीमती रजनी शर्मा
                     बस्तरिया
जिला            रायपुर छत्तीसगढ़
विधा।          मुक्त छंद
शीर्षक।        "पलाश मगन है ‌ 
                    फाग    फागुन में    ‌"


पलाश मगन है  फाग फागुन में
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चूल्हे की आग में,
कागज़ की नाव में,
दुपहरी को गांव में, 
अमरईय्या की छांव में,
मेला जाने के चाव में,
बिवाईयों वाले पांव में...............

कोयलिया  के गान में,
पीहरिया गठरी के मान में,
अल्हड़ता के गुमान में,
बैलगाड़ी की शान में,
पायलों के सुर तान में..........

तितलियों के पांखों में,
बाट जोहती आंखों में,
लरजती हुई शाखों में,
दीप अलाव के खोखों में...........

बंजारा गाता है अपनी धुन में
 मौसम की मुंहदिखाई शगुन में,
कुदलईय्या है जंगल कानन में,
 छाप _तिलक है विकल मन में,
पलाश मगन है फाग फागुन में....

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