Saturday, March 20, 2021

नलिनी बाजपेयी की रचना- चंदन

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,जिला -कांकेर,( छ. ग.,)
  रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
    संबलपुर,जिला-कांकेर,( छ.ग.)
          विषय-चंदन
             दिनाँक-20.03.21
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            *चंदन*

मदमाती गंध लिए, 
संदली सुगंध लिए,
चंदन की बगिया में 
चंदन की सुरभि बिखरेगा।

कोई कितना छुपाएं, 
विषधर कितना भी बहकाएं,
प्रकृति ही है सुगंध लिए 
तो मलयज तो महकेगा।

देवों के सिर पर चढ़ 
गर्व से इठलाता है ,
जिस को भी मिल जाएं 
अपना भाग्य सराहेगा।

चाहे कोई काटे,चाहे छांटे,
चाहे अनल जलाएं,
सौन्दर्य की सुंदर सौगात
 लिए सुगंध  तो फैलेगा ।

पत्थर में घिसोगे,अंगार भरे 
हिय को  शांत करेगा,
नागों के गरल भरे फूफकार 
लिए मलयानिल सा बहकेगा।

मेरी कोई आस नहीं, 
विश्वास लिए ,
सच्चे हृदय में सुगंध लिए,
जीवन भर महकेगा ।

मैं शाश्वत सनातन 
मेरी सुरभि की क्या कहूँ,
जीवन भर हर शब्दों पर 
नवल छंद बन निखरेगा।

      नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)

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