Saturday, March 20, 2021

संतराम कुम्हार की रचना- चंदन

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
    विषय - चंदन
     विधा - छंदमुक्त कविता 
   शीर्षक - " चरित्र का चंदन "
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चरित्र का चंदन,
जितना हो सके उतना महकाइये।
मन के अवगुणों को दूर कर,
सगुण के फूल खिलाइये।।
चरित्र का चंदन महकाइये।। 

खुशबू चंदन की पहचान है। 
आज कौन चरित्रवान् है?
लिप्त सब कुकर्मों में, 
रावण मिलना बहुत आसान है। 
छवि रामजी सा बनाइये।
चरित्र का चंदन महकाइये।। 

व्यवहार ही चरित्र है। 
कलयुग बहुत विचित्र है। 
दुविधा भरी यह जीवन सारी, 
पता नहीं कौन सच्चा मित्र है।। 
सुदामा सा मित्र बनाइये।
चरित्र का चंदन महकाइये।। 

चरित्र जन्मों जनम की पूंजी है। 
मशहूर होने की असली कूंजी है। 
दूसरों पर ऊंगली उठाने वालों, 
देख जरा कहाँ तेरी लूंगी है।। 
आइना खुद को पहले दिखाइये।
चरित्र का चंदन महकाइये।। 

चरित्र औरत का गहना है। 
चरित्रहीन तुझे नहीं बनना है। 
पूजी जाती देवी की तरह, 
सम्मान स्त्री का सबको करना है।। 
माता सीता सी किरदार निभाइये।
चरित्र का चंदन महकाइये।। 

माता-पिता का सम्मान करो। 
जीवन उनके नाम करो। 
भगवान के अवतार धरती पर ओ,
सेवाभाव से चरण उनके पान करो।। 
श्रवण सा तीर्थ घुमाइये। 
चरित्र का चंदन महकाइये।। 

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मौलिक रचना ( स्वरचित ) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

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