रचियता - श्रीमती ज्योति माला सिन्हा
स्थान - मनेंद्रगढ़
जिला - कोरिया
शीर्षक - धरा
है नमन भारत भूमि वसुंधरा को
जिसके उत्तर में पर्वतराज हिमालय मुकुट बनकर सुशोभित हो रहा है
जिस के दक्षिण में कल कल करती
नदिया चरणों को धो रही है
है नमन इस शस्य श्यामली
धरा को
जिसकी सुंदरता को देखकर
देव भी अचरज करते हैं
और इस धरा पर अवतार
लेते रहते हैं
है नमन इस पावन धरा को
जिसमें प्रभु श्री राम और
कृष्ण ने अवतार लिया
धर्म और न्याय का पाठ
जनमानस को है पढ़ाया
कर्म ही प्रधान है यह बात
लोगों को बतलाया।
है नमन इस पवित्र धरा को
जिसमें अनेक वीर पुत्रों ने
जन्म लिया और मातृभूमि
की रक्षा के लिए वीरगति
को प्राप्त हुआ।
है नमन इस जीवनदायिनी
धरा को
जिसमे समस्त प्राणियों
का पालन पोषण होता है
खूबियों से भरी है ये धरा
जिसके बखान के लिए शब्द भी कम पड़ता है।
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