Tuesday, March 23, 2021

धरती की खूबसूरती-गिरधारी लाल चौहान


नाम ---गिरधारी लाल चौहान
स्थान--- नवापारा खुर्द/ सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा---आलेख /कविता/ ग़ज़ल
विषय ---धरा
शीर्षक ---धरती की खूबसूरती

             ए धरा खूबसूरत, जहां में सबसे ।
               ज्यों का त्यों है,बनी है जबसे।

       कहीं पहाड़ कहीं जंगल, कहीं पर सरिता ।
      जिसकी खूबसूरती का ,गीत गाए कविता ।
     पृथ्वी धरती वसुंधरा,धरणी नाम अलग  से ।

    अहा समतल मैदान, जहां उगते गेहूं धान ।
 बादल करती वर्षा,  खुशी से झूमें किसान ।
      सुखों की गंगा बहती, बह रही तबसे ।

मन को मोहता मरुस्थल, उछल कूद करते ऊंट ।
पानी को तरसते लोग, मिले मुश्किल से एक घूंट ।
          फिर भी जीवन हरे भरे,मिलते  हैं गजब से ।

छोटे बड़े पेड़ उगे, कुछ आकाश को छूते ।
डाल मनोहर पत्ते सुंदर,फल फूलों से लदे ।
   वर्षा बादल वायु बुलाते, अपने समय पे ।

 अपनीधरती सोना चांदी, हीरे-मोती से भरी ।
पाने वाला मानव कहता,भाग्य में था दी हरी ।
    बराबर वह डालने वाली,  हिस्सा में सबके ।

        सब लोकों में यह भू लोक, सबसे है उत्तम ।
           मानव क्या देव भी,उसकी बताते महत्तम ।
            कहूं मैं जय धरा की जय,  कहने जग से ।

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