नाम ---गिरधारी लाल चौहान
स्थान--- नवापारा खुर्द/ सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा---आलेख /कविता/ ग़ज़ल
विषय ---धरा
शीर्षक ---धरती की खूबसूरती
ए धरा खूबसूरत, जहां में सबसे ।
ज्यों का त्यों है,बनी है जबसे।
कहीं पहाड़ कहीं जंगल, कहीं पर सरिता ।
जिसकी खूबसूरती का ,गीत गाए कविता ।
पृथ्वी धरती वसुंधरा,धरणी नाम अलग से ।
अहा समतल मैदान, जहां उगते गेहूं धान ।
बादल करती वर्षा, खुशी से झूमें किसान ।
सुखों की गंगा बहती, बह रही तबसे ।
मन को मोहता मरुस्थल, उछल कूद करते ऊंट ।
पानी को तरसते लोग, मिले मुश्किल से एक घूंट ।
फिर भी जीवन हरे भरे,मिलते हैं गजब से ।
छोटे बड़े पेड़ उगे, कुछ आकाश को छूते ।
डाल मनोहर पत्ते सुंदर,फल फूलों से लदे ।
वर्षा बादल वायु बुलाते, अपने समय पे ।
अपनीधरती सोना चांदी, हीरे-मोती से भरी ।
पाने वाला मानव कहता,भाग्य में था दी हरी ।
बराबर वह डालने वाली, हिस्सा में सबके ।
सब लोकों में यह भू लोक, सबसे है उत्तम ।
मानव क्या देव भी,उसकी बताते महत्तम ।
कहूं मैं जय धरा की जय, कहने जग से ।
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