सुन्दगढ़, ओडिशा
विधा-कविता
विषय-फागुन
फागुन आया,फागुन आया
तन-मन में उमंग है छाया
झूम के आया है यह मधुमास
प्यार के रंगों में रंगने की है आस
दुल्हन सी सजी है आज प्रकृति
जैसे मादकता में हो सारी सृष्टि
अंगारे सी दहक रही पलाश वन में
पक्षियों का कलरव छाया है उपवन में
फागुन आया,फागुन आया
तन-मन में उमंग है छाया
मंजरियों से लदी है डालियां आम की
कहीं बिछी है सेज महुआ की
चिड़िया झूल रही है डाली-डाली
कोयल कूक रही होकर मतवाली
यौवन छाया है आज मन में
थिरक रहे हैं कदम खुमारी में
फागुन आया,फागुन आया
तन-मन में उमंग है छाया
रंगों की बासंती बेला मे
प्रकृति सजी है चहुंओर मेला सी
पकवानों से सजी है थाल
अबीर बिखरी है कहीं हरि कहीं लाल
अंग-अंग भीग रहा रंगों में
फागुन की धुन भी है तरंगों में
फागुन आया,फागुन आया
तन-मन में उमंग है छाया।।
Nice mam
ReplyDeleteBahut sunder
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