ग्राम-लुकाउपाली छतवन
विषय-फागुन
शीर्षक-फागुन महीना
विधा-कविता
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सुरुर - सुरुर चलत हावय बसंत पुरवैया।
पिया के संदेश ल भेजय परदेशिया पास।।
आमा के डार म कुहु कुहु कुहुके कोयलिया।
महर - महर महके आमा मउर ले अमरईया।।
अमरईया के आमा दुल्हा कस मउर बांधय।
दुल्हीन कस परसा रानी घुंघट डारय।।
जग-अम्बर सुघ्घर बने हावय मडवा।
रंग-गुलाल बगरावत हे बसंत फागुनवा।।
हरिहर-हरिहर दिखय सुघ्घर चारो कोति रुख-राई।
कोरे गाथे कस दिखय सुघ्घर धरती दाई।।
खेत-खार म कमाईया मन गावय करमा ददारिया।
मधु बन म रास रचावय राधा संग कन्हैया।।
पियर पियर सरसों फूले,मौहारी म झरय महुआ।
पिहु पिहु बोले पपीहा,मीठ्ठु मीठ्ठु बोले सुआ।।
फागुन महीना पहुना बना के आये।
बसंत रितु जम्मो कोनो के मन भाये।।
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