दिनांक 23-3-21
विषय -धरा
रचनाकार सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग़.
शीर्षक -धरा तेरे उपकार
धरा तेरी सहनशक्ति को नमन।
कैसे तेरा बखान करुँ।
तेरे चरणों मे ये शीश धरु।
और तुमको प्रणाम करुँ।
तुझसे ही बनी मेरी काया।
तुझमे ही पला ये जीवन,
कैसे गुणगान करुँ।
तेरी वादियों मे खूबसूरत।
फूल और कलिंया,
और तुझको प्रणाम करुँ।
एक दिन मिट्टी का बना तन,
मिट्टी मे मिल जाना है।
मुझको अपने मे समा लेना माँ।
तुझसे मनुहार करुँ।
और तुझको प्रणाम करूँ।
फल, फूल लदे तेरी गोद मे,
पूरा संसार पले तेरी छाँव मे,
कैसे ये उपकार कहूँ
और तुझे प्रणाम करुँ।
अनमोल खजाने भी है
नदिया, नहरे खेत खलिहान
सब तुझसे ही आधार पाते।
रत्न , हीरा, पन्ना तेरे गर्भ मे,
होते है ये बात कहूँ।
और तुझे प्रणाम कहूँ।
तेरा कर्ज ना चूका पाँऊ ।
तुम तो जननी से भी बड़ी हो,
जिस धरती मे हमने जन्म लिया।
उस धरती का सम्मान करुँ।
और तुझे प्रणाम करुँ।
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