Saturday, March 27, 2021

श्वेता सिंह क्षत्रीय की रचना- निन्दिया

रचियता - श्रीमती श्वेता सिंह क्षत्रीय
जिला - जांजगीर चाम्पा (छ ग) 
विषय - निन्दिया
- - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - -

निन्दिया हूँ मैं निन्दिया
आँखों में बसकर सुकुन दिलाती हूँ,
नए-नए ख्वाब संजोकर
नया राह दिखाती हूँ।
काली अंधेरी रात की हूँ साथी मैं,
छोटे बड़े सबका साथ निभाती हूँ।
रात की हूँ साथी मैं
दिन में मेरा काम नहीं,
दिन में आ जाऊ तो
मंजिल तक पहुँचाती नहीं।
अमीरों के पास धन हैं
उनका साथ ज्यादा निभाती नहीं,
गरीबों से है मेरा गहरा नाता
उनसे दूर जाती नहीं।
धरती माँ के सारे जीव-जंतु का
रखती मैं तो ध्यान,
मेरे लिए न कोई छोटे न कोई बड़े
न मुझमें कोई अभिमान।
सूरज ढ़ले, चाँद के आने से पहले
सारे पक्षी सो गए,
नए नए सपने लिए
अब तो वो कही खो गए।
निन्दिया हूँ मैं निन्दिया
मुझे पाने की ज्यादा चाहत न रख,
अपने कर्म की ओर निरन्तर बढ़े चल
मंजिल पायेगा बेसक।।।

5 comments:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...