Saturday, March 27, 2021

मोनालिसा बेहरा की रचना- नींद

रचियता-मोनालिसा बेहरा
सुन्दगढ़, ओडिशा
विधा-काव्य
विषय-नींद

हजारों सपने,सैकड़ों अपने
अक्सर नींद में ही मिलते हैं
नींद बड़े प्यारे होते हैं
ख्वाबों को सच कर जाते हैं

अक्सर रातो में ख्याल तुम्हारा
नींदों को पास आने नही देती
उनींदी आंखों के पलको तले
छुप-छुप के पहरा है देती

नींदों में सपनो की सीमा नही होती
अनन्त ,अपरिमित हमें संग बहा ले जाती
सच की जमीं के अधूरे ख्वाबों को
नींदें सपनों में ही सही, पूरी कर जाती

सांसे जितनी ही जरूरी नींदे भी होती
सच होते हैं सपने जब नींद है पूरी होती
तन -मन मे उत्साह नींद ही है लाती
आंखों से गहरा रिश्ता नींद है निभाती।।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...