ग्राम -बुलाँकी
जिला -रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
विधा- आलेख
विषय- नींद
दिनांक- 27 /03/ 2021
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*नींद*
नींद भी मनुष्य के शरीर के लिए आवश्यक क्रिया है। शरीर की व्यवस्था बनाए रखने के लिए नींद की आवश्यकता होती है। नींद में शरीर की कार्य गत क्रियाएं शिथिल रहती है। कोशिकाओं को भी आराम की आवश्यकता होती है। इस क्रिया में शरीर की संचालन स्थिर रहता है। लेकिन मन क्रियाशील रहता है। मन नहीं सोता है, तन सोता है। मन कभी सोता नहीं, शरीर सोता है। मन शरीर के बाद भी शरीर के साथ भी निरंतर क्रिया करता है ।क्योंकि मन अमर है। शरीर नश्वर है। शरीर विचलित होता है। मन में रचना विरचना क्रिया नहीं होता। इसलिए मन अमर है। मन को नीद या आराम की आवश्यकता नहीं है ।शरीर के अंगों को क्रिया करने से, उर्जा की ह्रास होने से कोशिकाओं को ,ऊर्जा पूर्ति करने के लिए आराम की जरूरत होती है। इसी क्रिया को नींद कहा जाता है। स्वस्थ मनुष्य को नींद या आराम शरीर व्यवस्था के अंतर्गत अनुसंधानकर्ताओं ने 6 घंटा बताए हैं ।इससे अधिक या इससे कम में शरीर अस्वस्थ हो जाता है। जिसका परिणाम रोग के स्वरूप में शरीर में व्यक्त होता है। अतः नींद जिस तरह ,शरीर व्यवस्था के लिए भोजन जरुरी है। उसी तरह नींद भी मानव के लिए जरूरी है। अतः नींद के बारे में पूरी जानकारी हर मनुष्य को होनी चाहिए।ताकि सही समय में नींद का उपयोग कर शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। जिसका प्रभाव मन पर भी पड़ता है । स्वस्थ शरीर से मन भी खुश रहता है और शरीर को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी स्वस्थ मन को होता है। सोते हुए व्यक्ति को विशेष आवश्यकता पड़ने पर ही उठाना चाहिए ।अनावश्यक कार्य हेतु नहीं। इस तरह नींद का सदुपयोग कर हमेशा हर मनुष्य खुश रह सकता है ।अपने शरीर की स्वस्थता को बनाए रख सकता है।
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उर्मिला सिदार बुलाँकी रायगढ़ छत्तीसगढ़
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