रचनाकार- श्रीमती रजनी शर्मा बस्तरिया
जिला- रायपुर छत्तीसगढ
विधा- मुक्त छंद
शीर्षक- "बाहुपाश में मन चंदन"
जीवन का पहिया,
करता रोज दोलन ।
चाहे नित पड़े इनमे,
विषाक्त द्रव्य का ओनन ।
उस भुजंग का क्या दोष?
भाता उसे भी है चंदन ।
मन अंतस के सहस्त्र भुजंग ,
बाहुपाश में इनका मन चंदन ।
रत्न उजागर हो जाता है,
होवै जब धरती का खनन।
तासीर सबकी होती अलग ,
चाहे शेष फिर होवै चंदन.........
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