Thursday, March 4, 2021

नलिनी बाजपेयी की रचना- ढलैत

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,जिला-कांकेर, (छ. ग.)
 विषय-ढलैत,दिनाँक-04.03.21

                ढलैत

   अज्ञान का तिमिर हरने 
              को तुम ज्ञान दीप बनो,
 निर्बल का बल बनने
                तुम युद्धवीर बनो।

  शोषित पीड़ित मानवता 
                   का रक्षक बन,
 सहज सुलभ दया 
             करूणा सा श्रृंगार बनो ।

समाज में जो हो 
             दलित,पीड़ित हो,
उसके अधरों की तुम 
मधुर मुस्कान बनो।

 समर क्षेत्र में जब मची 
        मार काट हो,ले करवाल 
तुम दुश्मनों के लिए ढाल बनो।

 जीवन भी एक समर  
          है यारों ,प्रतिपल संघर्षों
 से सुंदर निखार बनो ।

बाधाओं को गले लगाओ ,
         पाँव की थकान भगाओ ,
काल के समक्ष तुम कालजयी 
           बन संजीवनी की खान बनो। 
__________________________
     नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर,कांकेर, (छ. ग.)

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...