संबलपुर,जिला-कांकेर, (छ. ग.)
विषय-ढलैत,दिनाँक-04.03.21
ढलैत
अज्ञान का तिमिर हरने
को तुम ज्ञान दीप बनो,
निर्बल का बल बनने
तुम युद्धवीर बनो।
शोषित पीड़ित मानवता
का रक्षक बन,
सहज सुलभ दया
करूणा सा श्रृंगार बनो ।
समाज में जो हो
दलित,पीड़ित हो,
उसके अधरों की तुम
मधुर मुस्कान बनो।
समर क्षेत्र में जब मची
मार काट हो,ले करवाल
तुम दुश्मनों के लिए ढाल बनो।
जीवन भी एक समर
है यारों ,प्रतिपल संघर्षों
से सुंदर निखार बनो ।
बाधाओं को गले लगाओ ,
पाँव की थकान भगाओ ,
काल के समक्ष तुम कालजयी
बन संजीवनी की खान बनो।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर, (छ. ग.)
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