जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-ढलैत
विधा-कविता (मुक्त छंद)
गीली मिट्टी से मासुम
नन्हें बच्चों के ढलैत ,
कुभकार हैं शिक्षक।
अज्ञानी को ज्ञान दे
अंधकार में प्रकाश
के प्रतीक शिक्षक।
भटकते बचपन को
करीने से संवार कर
ढलैत ही बन जाते हैं ।
सृष्टि के निर्माणक हैं
अज्ञानता के संहारक
भाग्य के ढलैत शिक्षक।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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