Monday, March 1, 2021

लीलाधर कुम्हार की रचना- कानन पेंडारी

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)
विषय - कानन
विधा - छंद मुक्त काव्य
शीर्षक - कानन पेंडारी
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      // कानन पेंडारी //

का - कानन पेंडारी जहाँ ,
       वन्य जीवों का संग्रह ।
       बिलासपुर की शान है ,
       घूमने की सबको चाह ।।

न - नहीं कोई प्रदूषण जहाँ ,
      जंगल जैसा सौंदर्य ।
      तन - मन होते स्वस्थ ,
      देख - देख कर दृश्य ।।

न - नया अनुभव होता है ,
     शेर भालू हिरण के साथ ।
     सर्प लकड़बग्घा लोमड़ी ,
     दरियाई घोड़ा ऊँट जिराफ ।।

पें - पेंगुइन पक्षी नहीं है ,
     मोर बत्तख सारस बहुत ।
     जिसे देख बच्चे खुश होते ,
     बन्दर भी करते हुप - हुप ।।

डा - डाली - डाली पत्ते फूल ,
      मनमोहक कानन है ।
     वन्य प्राणियों का आश्रय ,
     श्रेष्ठ सराहनीय प्रबंधन है ।।
     
री - रीछ तो देखना भूल गए ,
     मछली घर भी बाकी है ।
     जल्दी करो कोई छूटे न ,
     कानन पेंडारी अच्छी है ।।

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