जिला - बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)
विषय - कानन
विधा - छंद मुक्त काव्य
शीर्षक - कानन पेंडारी
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// कानन पेंडारी //
का - कानन पेंडारी जहाँ ,
वन्य जीवों का संग्रह ।
बिलासपुर की शान है ,
घूमने की सबको चाह ।।
न - नहीं कोई प्रदूषण जहाँ ,
जंगल जैसा सौंदर्य ।
तन - मन होते स्वस्थ ,
देख - देख कर दृश्य ।।
न - नया अनुभव होता है ,
शेर भालू हिरण के साथ ।
सर्प लकड़बग्घा लोमड़ी ,
दरियाई घोड़ा ऊँट जिराफ ।।
पें - पेंगुइन पक्षी नहीं है ,
मोर बत्तख सारस बहुत ।
जिसे देख बच्चे खुश होते ,
बन्दर भी करते हुप - हुप ।।
डा - डाली - डाली पत्ते फूल ,
मनमोहक कानन है ।
वन्य प्राणियों का आश्रय ,
श्रेष्ठ सराहनीय प्रबंधन है ।।
री - रीछ तो देखना भूल गए ,
मछली घर भी बाकी है ।
जल्दी करो कोई छूटे न ,
कानन पेंडारी अच्छी है ।।
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