Monday, March 1, 2021

नलिनी बाजपेयी की रचना- कानन

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,जिला-कांकेर, (छ. ग.)
 विषय-कानन,
दिनाँक-01.03.21

              कानन

वनाच्छादित कानन 
        लगते कितने प्यारे,
भिन्न-भिन्न तरू -विटप 
           खिले न्यारे-न्यारे।

इस कानन में सब 
      एक-एक पेड़ लगाओ यारों,
पेड़ काटकर उपवन
       संग वतन ना उजाडों।

कट रहे जंगल मच रही 
       जग में तबाही भारी,
प्रकृति क्षण-क्षण रूप 
       बदल रही,फैल रही महामारी।

कटते कानन,तपती धरती,
           सामने खड़ी चुनौती,
हरी-भरी धरती रहे,
       मानवता दीर्घायु हो माँगे मनौती।

कानन हमारी जिंदगी
         सुख-समृद्धि का है आधार,
पेड़-पौधों से मिले शुद्ध हवाएं, 
               सुखमय हो संसार।
____________________

     नलिनी बाजपेयी
   संबलपुर,कांकेर, (छ. ग.)

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