संबलपुर,जिला-कांकेर, (छ. ग.)
विषय-कानन,
दिनाँक-01.03.21
कानन
वनाच्छादित कानन
लगते कितने प्यारे,
भिन्न-भिन्न तरू -विटप
खिले न्यारे-न्यारे।
इस कानन में सब
एक-एक पेड़ लगाओ यारों,
पेड़ काटकर उपवन
संग वतन ना उजाडों।
कट रहे जंगल मच रही
जग में तबाही भारी,
प्रकृति क्षण-क्षण रूप
बदल रही,फैल रही महामारी।
कटते कानन,तपती धरती,
सामने खड़ी चुनौती,
हरी-भरी धरती रहे,
मानवता दीर्घायु हो माँगे मनौती।
कानन हमारी जिंदगी
सुख-समृद्धि का है आधार,
पेड़-पौधों से मिले शुद्ध हवाएं,
सुखमय हो संसार।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर, (छ. ग.)
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