स्थान-नौगाँव
जिला-छतरपुर-म.प्र.
विषय-चंदन
विधा-पद्य
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इस धरती की माटी चंदन
उसका तिलक लगाऐ हम।
जिसने हमको जन्म दिया है
कैसे कर्ज चुकाऐं हम।
माँ की गोद में आकर हम
दुनिया से लड़ जाऐंगे
खुशबू बनकर इस दुनिया को
चंदन सा महकाऐं हम।
चंदन की शीतलता जग में
संस्कृति की पहचान है
तपिश दूर करे मानव का
जीवन त्याग ,बलिदान हे।
चंदन है पूजा का अमृत,
उसका तिलक लगाऐं हम।
सनातन धर्म की है पहचान,
उसका ,कर्म महान् है।
तप कर अग्नि में जैसे सोना,
और निखरता जाए ।
विषधर लपेटे अपने तन पर,
फिर भी चंदन ही कहलाऐ ।
मन बन जाऐ जो चंदन सा ,
प्रेम की खुशबू से महके जीवन।
दूरियों मिटा कर फिर, ,
सद् भावना के फूल खिल जाऐं।
चंदन सी फिर महके धरती
जाति-पाति के बंधन तोड़
वीरों की खुशबू से भर जाऐ
धरती माँ का आँचल भी।
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