नाम ----गिरधारी लाल चौहान
स्थान ----नवापारा खुर्द/ सक्ति
जिला---- जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा---आलेख /कविता/ ग़ज़ल
विषय--- मोक्ष
शीर्षक---- मेरा मोक्ष अंतिम में
मोक्ष मुझको बाद में देना ।
नहीं है सबसे पहले लेना ।
जब सबका मोक्ष हो जाए ।
मोक्षदाता याद कर लेना ।
मोक्ष का विरोध नहीं कर रहा ।
मोक्ष लेने से नहीं डर रहा ।
मोक्ष तो जीवन का अंग है ।
मेरा भी झोली उससे भर देना ।
मोक्ष लेने ही धरा पर आया हूं ।
मोक्ष की बात यहीं समझ पाया हूं ।
मोक्ष वालों की मैंने संगत की है ।
अंतिम में यह अवसर देना ।
सबका होते मैं देखना चाहता हूं ।
मोक्ष को अच्छी तरह समझना है ।
मोक्ष जिन्हें चाहिए दिलाना है ।
कहोगे तैयार कर लूंगा सेना ।
मोक्ष के लिए तपस्या किए गए ।
मोक्ष के लिए दान किए गए ।
मोक्ष के लिए धर्म का सहारा लिए ।
जरुरत पड़ेगा मुझे भी सहारा है लेना ।
न मैं धनवान हूं इस जग का ।
न नेता न नेताओं का मुखिया ।
न दानी न धर्माधिकारी हूं ।
स्वीकार मुझे अंतिम में लेना ।
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