रचनाकार - डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर"
जिला - बलौदाबाजार
विधा - दोहा
विषय - धरा
★★★★★★★★★★★★
शीर्षक - पुण्य धरा
★★★★★★★★★★★
जन्म लिए जिस पुण्य धरा पर,
देखो सबसे न्यारा हैं।
हम भारत के वासी हम तो,
कण -कण इसका प्यारा है।
हिन्द देश के वालों सुन लो,
देश की मान बढ़ाना हैं।
प्रेम सद्भावनाओं में रहकर,
सबको गले लगाना हैं।
कलुष कपट मत रखना मन में,
प्रेम की गंगा बहाना हैं।
हिन्दू मुस्लिम भाई-भाई,
ऐसा फर्ज निभाना हैं।
ऋषियों और मुनियों ने सदा,
जग को आज सुधारा हैं।
हम भारत के वासी हम तो,
कण -कण इसका प्यारा है।
आधुनिक इस दौर में युवा,
नित नित आगे बढ़ता हैं।
कर्मपथ से नहीं झुकता,
सरहद में वीर लड़ता हैं।
दुःसाहस जब करे दुश्मन,
सबको सबक सिखाया हैं।
पुण्य तिरंगे की रक्षा में,
शान से तिरंगा लहराया हैं।
देश के वीर सीमा में डटकर,
दुश्मन को ललकारा हैं।
हम भारत के वासी हम तो,
कण-कण इसका प्यारा हैं।
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