संबलपुर,जिला -कांकेर,( छ. ग.)
विषय-पलाश
दिनाँक-02.03.21
पलाश
आया मृदुल मनोरम
मधुमास सखी,
जंगल-जंगल पलाशी
पुष्पों की आग लगी।
टेसू के फूलों के रंगों
से चुनरी रंग लो,
तन मन मदमस्त
हो जाएं अलबेली।
भांग, गुलाल संग
छाई फागुनी बयार,
किंशूक सुमन के गन्ध
ने मन मोह लिया करो एतबार।
सूना पड़ा है विपिन
मगर टेसू की छाई बहार,
अधूरी प्यास, तृषित
निगाहें करने लगी रार।
टेसूई रंगों से भर
गया धरा ,आकाश,
इंद्रधनुषी प्यार ने
पिय से की बातें खास।
मधुमास में दुनियाँ
डूबी होगी तब आऊँगी,
ख्वाबों के सुई धागे से
तुरपाई कर ताबीर बनाऊँगी।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर, (छ. ग.)
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