स्थान -नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला-- जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा -कविता/आलेख
विषय -नवीनीकरण
शीर्षक- नवीनीकरण के उदाहरण
प्रकृति से सीखा जा सकता है नवीनीकरण ।
पतझड़, शीत, बसंत, ग्रीष्म इसका उदाहरण ।
मशीनें भी चलती है इसी क्रम में ।
जरुरी है परिवर्तन परिश्रम में ।
चोट की जाती है लोहा गरम में ।
ए दुनियां चलती है अनुक्रम में ।
जहां मशीनें रुक जाती लगती नई है यही निवारण ।
समय के साथ बदलते विचार ।
बदल जाती नियमों का आधार ।
गुणहीन हो जाते पुराने संस्कार ।
शुरु हो जाते यहां नवीन व्यापार ।
कहते फिरते आजकल इसी का है बहुत प्रचलन ।
खिलौने भी बदल जाते सबके ।
खेल भी बदलते रहते झटसे ।
मनोरंजन का यही हाल है ।
पुराने रह जाते कटके ।
कह नहीं सकते आज क्या बुढ़ापा क्या बचपन ।
दादी अब नहीं कहती कहानी ।
अब के राजाओं के सात न रानी ।
दास दासी का चला गया जमाना ।
बदली सब की जीवन निशानी ।
जीवन अपना समझ अपना सबका अपना लक्षन ।
वेषभूषा रहन सहन खान-पान ।
इसका भी बदल जाता सामान ।
आवक जावक लेन देन पर भी ।
छाया माया का होता वरदान ।
उसी बात पर अलग-अलग चलने लगते प्रहसन ।
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