जिला - बलौदाबाजार (ग. छ.)
विषय - नवीनीकरण
विधा - मुक्त काव्य
शीर्षक - नवीनीकरण चाहिए
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// नवीनीकरण चाहिए //
उलझन ग्रस्त निराश मन मे ,
रूखे - सूखे हृदय - भवन में ,
कष्टों से पीड़ित जीवन मे ।
आशा उमंग उत्साह का ,
नवीनीकरण चाहिए ।।
दुर्गुण दोष बुराईवाले ,
भोग - वासना के मतवाले ,
प्रभु - भक्ति से भागनेवाले ।
उन्हें कथा - सत्संग का ,
नवीनीकरण चाहिए ।।
झूठ कपट निंदा के रसिक ,
रावण - कंस के पाप पथिक ,
जिनका जीवन घोर तामसिक ।
उन्हें सात्विक सत्य धर्म का ,
नवीनीकरण चाहिए ।।
जो साहित्यिक लेखन करते ,
ज्ञान प्रकाश जग में फैलाते ,
मानव समाज को आगे लाते ।
विमल विवेक स्वाध्याय का उनमे ,
नवीनीकरण चाहिए ।।
जो बच्चों को शिक्षा देते ,
स्कूल और कॉलेज में पढ़ाते ,
नवाचार तकनीक सिखाते ।
नैतिकता वैदिक संस्कारों का ,
नवीनीकरण चाहिए ।।
जो मेहनत मजदूरी करते ,
सींच पसीना फसल उगाते ,
पत्थर तोड़ते ईंट बनाते ।
सुख संतोष से रहने का ,
नवीनीकरण चाहिए ।।
मंत्री नेता पत्रकार को ,
अधिकारी और सरकार को ,
सबके कार्य - व्यवहार को ।
देश भक्ति जन सेवा का ,
नवीनीकरण चाहिए ।।
साधु संत कथावाचक ,
पंडित ज्ञानी धर्म प्रचारक ,
भक्त पुजारी सारे साधक ।
संस्कृति के रक्षण का उनमे ,
नवीनीकरण चाहिए ।।
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