Tuesday, February 16, 2021

एच-एस-अरमो कृत आलेख- परजीवी


रचनाकार-एच-एस-अरमो ,अरमान ।
निवास-बायरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
विधा-आलेख ।
शीर्षक-""परजीवी """  ।
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○○○••||परजीवी ||••○○○
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           जबसे सृष्टि का निर्माण हुआ है  ।उसी समय से पृथ्वी में परजीवियों का अस्तित्व रहा है ।हम सामान्य रूप से यह कह  सकते हैं कि दूसरे जीवों व वनस्पतियों के ऊपर आश्रित रहकर अपना जीवन निर्वाह करते हैं और कभी-कभी तो उसका जीवन ही तबाह कर देतें हैं ।
          जल,थल में पल्लवित जीव-जन्तु व वनस्पतियों में पलने वाले कई प्रकार के वायरस भी परजीवी होती है और कुछ खुली आँखों से भी देख सकते हैं और कुछ वनस्पतियाँ लता या बेल के रूप भी होते हैं ।कुछ बाहरी आवरण में पलते हैं और कुछ शरीर के आन्तरिक भाग में पलते हैं ।दोनों ही स्थितियों में ये प्राणघातक सिद्घ होते हैं और कुछ अतिसूक्ष्म रूप में होते हैं,जिन्हें साधारणतया खुली आँखों से नहीं देख सकते हैं ।यहाँ तक कि कुछ तो संक्रमण फैलाने में अति सक्रीय होते हैं और कुछ अपने आकार,प्रकार में परिवर्तन करते रहते हैं ।
       वैज्ञानिक खोज में पाया गया है कि वातावरण,जीव-जन्तुओं,पक्षियों,का सम्पर्क होता है यदि वो परजीवी से प्रभावित होकर अन्य लोगों तक फैला सकने में सक्षम होते हैं और कुछ लाभदायक परजीवी भी होते हैं,जो उस जीव-जन्तु को सकारत्मक लाभ भी प्रदत्त करते हैं ।
     पृथ्वी में पाये जाने वाले कई परजीवी औषधीय गुणों से लबालब होते हैं जो गंभीर व जटिल बिमारियों की दवाइयों के रुप में,काम आते हैं ।आज जिस कोरोना वायरस से सारी दुनिया इसके प्रभाव से बैचैन है ।    
        अतःअन्त में यह कहना चाहता हूँ कि मानव जाति के लिए कुछ परजीवियों की प्रजाति लाभदायक और कुछ हानिकारक प्रभाव डालते हैं ।वैसे पारिस्थितिकी तंत्र का महत्व परजीवी  के बिना अधूरा ही रह जाता है ।किन्तु बहुतायत में परजीवी औषधीय पौधों की खोज जारी है ।संक्रमण फैलाने वाले परजीवी वायरस से निजात दिलाने के लिए डाँक्टर,वैज्ञानिक मिलकर वैक्सीन तैयार करते हैं ताकि गंभीर महामारी से पूर्ण रूप से निपटने के लिए रामबाण औषधि सिद्घ हो सके ।
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