स्थान--- नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा ----आलेख
विषय ----परजीवी
शीर्षक --क्या मानव भी परजीवी है
परजीवी से आशय है ऐसा पौधा अथवा प्राणी जिसका आवास तथा भोजन एवं सुरक्षा दुसरो पर आश्रित रहता है और उसी के सहारे चलते है । जैसे जूं जो मनुष्य के बाल में पाया जाता है जो खून चूसकर जीवित रहता है और अपने समान जूं को अण्डे के सहारे जन्म देता है,कृमि, जोंक आदि प्रत्येक प्राणी को जीवित रहने के लिए विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति करनी पड़ती है यह पूर्ति अपने आसपास में पाये जाने वाले पदार्थों से करता है ।
जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है वह भोजन की व्यवस्था प्रकृति निर्धारित नियमों के तहत प्राप्त करता है जीवित रहता है वंश वृद्धि करता है । कुछ प्राणी आवास के लिए दूसरे प्राणी के आवास का उपयोग करते हैं कुछ समय वही रहकर अण्डे देते हैंभले ही वह मानव जाति के लिए लाभप्रद नहीं होता नुकसान उठाना पड़ता है । परजीवी की उत्पत्ति की वैज्ञानिक अवधारणा है उन अवधारणाओं का भली भांति ज्ञान प्राप्त करके जाना जा सकता है । उनके अध्ययन को पारजैविकीय विज्ञान कहते हैं । कुछ जंतुओं में मक्खी पाये जाते हैं जीवित रहने के लिए खून पीते है जीवित रहते एवं वंशवृद्धि करते हैं । कुछ परजीवी पौधे होते हैं जो अपने लिए पौधों से भोजन प्राप्त करते हैं । जैसे अमर बेल का पौधा ।
कुछ लोगों की धारणा है कि भोजन आवास और सुरक्षा पर दूसरे प्राणियों पर आश्रित रहते हैं क्या मानव भी इस श्रेणी में आता है तो मानव अपने लिए भोजन अन्य साधनों से प्राप्त करता है रहने के लिए मकान घर खुद निर्माण करता है और आवासित रहता है । सुरक्षा के लिए वह उपाय करता है और उसमें सुरक्षित रहता है ।मानव इस कारण से परजीवी की श्रेणी में नहीं आता ।
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