स्थान ---नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा ---कविता/आलेख
विषय ---खोज
शीर्षक---खोज का साथी
खोज में लगा रहता,जो अपने भविष्य का ।
निर्माण हो जाता है,उस नवीन दृश्य का ।
चिड़िया घोंसला बना लेती है ।
मधुमक्खियां छत्ता सजा लेती है ।
बीज अपने जैसे पौधे उगा लेती है ।
मेघ छाकर जल बरसा देती है ।
अपमान नहीं होना चाहिए, अपने कृत्य का ।
समय पर आता है सावन
समय पर आता है पतझड़
समय पर आता है बसंत
समय पर गाती है कोयल ।
इंतजार होना चाहिए बस अपने समय का ।
सहज नहीं है खोजना,
लाखों लोग लगे हुए हैं ।
कुछ है एकदम नवीन तो,
कुछ इसमें पगे हुए हैं ।
कुछ तो संभावना होनी चाहिए मिलने का ।
खोजने से सब मिले हैं ।
और भी मिलते रहेंगे ।
खोजिए खोजिए लगिए।
सबसे हम यह कहेंगे ।
कर्म पूरा कीजिए,जग में अलग दिखने का ।
खोज ने मानव को यहां
जो चाहिए वह दिया है ।
खोज ही वह दौलत है ।
जिसने उपकार किया है ।
जब तक न मिल जाए, लक्ष्य में है रहने का ।
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