Wednesday, February 17, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- खोज

नाम ----गिरधारी लाल चौहान
स्थान ---नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा ---कविता/आलेख
विषय ---खोज
शीर्षक---खोज का साथी

खोज में लगा रहता,जो अपने भविष्य का ।
निर्माण हो जाता है,उस  नवीन  दृश्य का ।

चिड़िया घोंसला बना लेती है ।
मधुमक्खियां छत्ता सजा लेती है ।
बीज अपने जैसे पौधे उगा लेती है ।
मेघ छाकर जल बरसा देती है ।
अपमान नहीं होना चाहिए, अपने कृत्य का ।

समय पर आता है सावन
समय पर आता है पतझड़
समय पर आता है बसंत
समय पर गाती है कोयल ।
इंतजार होना चाहिए बस अपने समय का ।

सहज नहीं है खोजना, 
लाखों लोग लगे हुए हैं ।
कुछ है एकदम नवीन तो, 
कुछ इसमें पगे हुए हैं ।
कुछ तो संभावना होनी चाहिए मिलने का ।

खोजने से सब मिले हैं ।
और भी मिलते रहेंगे ।
खोजिए खोजिए लगिए।
सबसे हम यह कहेंगे ।
कर्म पूरा कीजिए,जग में अलग दिखने का ।

खोज ने मानव को यहां
जो चाहिए वह दिया है ।
खोज ही वह दौलत है ।
जिसने उपकार किया है ।
जब तक न मिल जाए, लक्ष्य में है रहने का ।

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