Wednesday, February 10, 2021

डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर" की रचना- दीप

रचनाकार :- डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर"
जिला - बलौदाबाजार
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - दीप संदेश
★★★★★★★★★★★★
         दीप संदेश
         ◆◆◆◆◆◆ 

           (1)
दीया घर-घर जलाना हैं,
अँधेरा सदा मिटाना हैं।
शुभ दीवाली की रौशनी से,
चारों ओर फैलाना हैं।
             (2)
टीस न मन में लाना हैं,
ऐसी उमंग जगाना हैं।
आत्मज्योति जगाकर,
सत्मार्ग में राह बढ़ाना हैं।
         (3)
लड़ाई किसी से न करना हैं,
बुराई किसी से न करना हैं।
प्रेमसद्भाव मन में जगाकर,
सबको गले लगाना हैं।
          (4)
गरीबों को नहीं सताना हैं,
अमीरी का धौंस न बताना हैं।
समन्वय सभी बनाकर ,
ऐसा मुहिम  चलाना हैं।
           (5)
सदकर्म ही करना हैं,
सत्यधर्म में रहना हैं।
परमज्योति की पुंज से,
दीपक जैसे चमकना हैं।
★★★★★★★★★
स्वरचित©®
डिजेन्द्र कुर्रे, "कोहिनूर"
छत्तीसगढ़(भारत)

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