जिला-कोरबा, छ.ग.
विषय- कवि के रुचि के अनुसार
विधा- कविता
शीर्षक- "ऐ मेरी कविता "
-----ये माना हमनें तू दर्द से उभरती है ।
कौंधते हुए दिमाग में तू , कलम की रगों में छा जाती है।
फिर अनेक रंग रुपों में उतरती है ।
ऐ मेरी कविता !
न होना जुदा कभी मुझसे, इतनी गुजारिश है तुमसे ।
ऐ मेरी कविता !
कभी गृहणीं की पीड़ा में समाना
कभी राजनीति की दलदल में घुसना ,
कभी गरीबों की कुटिया में जाना,
ऐ मेरी कविता !
तू रवि की किरणों में समाना ।
ऐ सूरज की किरणों ! अपने में विलीन कर लो मेरी लेखनी को ,
मैं रहूँ न रहूँ- तेरी किरणें तो रहेंगी ।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छ.ग.
बहुत सुंदर कविता लिखी है, इस कविता में कवियित्री ने सम्पूर्ण प्रकृति को समाहित कर लिया है। किसी कवि ने ठीक ही कहा है, जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि
ReplyDeleteकविता मात्र मन की पीड़ा से ही नही जागृत होती है कविता या लेखन कार्य करना बहुत ही मुश्किल कार्य होता है और जिसे यह हाशिल होता है यह गुण निश्चित ही उसपे माँ वीणापाणी का आशीर्वाद होता है।बेहद उत्तम रचना आप निरनतर लिखते रहिये हर मुद्दे पर आपकी कलम चलते रहे।यही दुआ है यही आशीर्वाद है यही कामना है धन्यवाद अविनाश सिंह
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