जिला--कोरबा, छ.ग.
विषय--इम्तिहान
विधा--कविता
शीर्षक-"इम्तिहान जिंदगी का"
-------ये जिंदगी प्रतिपल एक इम्तिहान है ,
पर इससे नहीं चाहिए हमें डरना ।
आग में जल कर ही तो निखरता है सोना ।
पीहर में तो होती है सौ गलती माफ ,
हर गलतियों में मिलती है- सीख ,.प्यार, दुलार और साथ में सम्मान।
यहाँ कहना नहीं भूलेगी कवियत्री--
ससुराल में होती है हर घड़ी बेरुखी भरी इम्तिहान,
माता-पिता से मिला संस्कार; होती है उत्तर पुस्तिका,
जिसके बलबूते मिलते हैं मान संम्मान।
वहीं ऊँचे ओहदे वालों के.सम्मुख आते हैं प्रतिपल इम्तिहान,
जिसे लेकर आते हैं उनके सम्मुख भ्रष्ट हर इंसान ।
इस अग्नि परीक्षा से उबारता है ; उसका विवेक और आत्मसम्मान ।
ईष्ट देव भी लेते हैं दुख की घड़ी में बंदों का इम्तिहान,
धैर्य की नौका में बैठ कर करना होता है सामना इस घड़ी का ,
फिर देर नहीं लगाते हैं भगवन ,
अपने श्री चरणों में देने को स्थान ।
इसलिए वाजिब है जिंदगी का होना प्रतिपल इक इम्तिहान ।
।।इति।।
"गोमती सिंह"
कोरबा, छ.ग.
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