स्थान ---नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला ----जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा ---आलेख/कविता
विषय ---इम्तिहान
शीर्षक ---हर पल इम्तिहान
हर पल इम्तिहान, बस देते जाइए ।
जैसा है कर्म, परिणाम लेते जाइए ।
इससे अलग कुछ, हुआ ही नहीं ।
इम्तिहान के बीच में,पलते जाइए ।
सोने को भी इम्तिहान, देना होता है ।
रगड़ना पीटना तपना, जलना होता है ।
इस तरह जीवन को अपना,भी बनाइए ।
इम्तिहान से अगर, तुम घबरा जाओगे ।
जो मंजिल तुम्हें चाहिए,वह कहां पाओगे ।
इम्तिहान से भयभीत जीवन,न बनाइए ।
सीता ने भी दी थी अपनी,अग्नि परीक्षा ।
लिखने वाले ने लिखा, समझाने की थी इच्छा ।
बस अपनी समझ समझने, के लायक बनाइए ।
ए जीवन भी परीक्षा है,जो दे रहे हम ।
निशदिन इसके बदले ,मिलता खुशियां गम ।
जो तुम्हारे भाग्य में है,सब लेते जाइए ।
सही राहों पर हरदम,कदम को रखो ।
बड़े से इस मन में न भ्रम को रखो ।
दुनियां से अलग अपने मन को बनाइए ।
दुनियां से कभी चापलूसी न, जाने वाली है ।
लोग सोचते हैं यह राह, सबसे निराली है ।
अपने मन भी पूछिए, सुनने की ओर न जाइए ।
सत्य तो जहां में, सबसे महान है ।
इसका पक्षधर तो, समूचा जहान है ।
इस राह को आंख मूंदकर,आप भी अपनाइए ।
अपना तो देख रहे, गैरों का भी देखिए ।
अपना तो सोच रहे, औरों का भी सोचिए ।
असहज नहीं सहज,यह जीवन बनाइए ।
तीर तो चला लिया,तीरन्दाज कहाने में क्या ।
सुख आए दुख आए,उसको अपनाने में क्या ।
दुनियां जान जाए, इससे न पीछा छुड़ाइए ।
No comments:
Post a Comment