निवास-बायरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
विषय-"अखब़ार की कीमत " ।
विधा-छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक-""अखब़ार की कीमत "" ।
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●¤•"अखब़ार की कीमत "•¤●
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अखब़ार एक सस्ते कागज पर छ्पा समाचारों का संकलन होता है ।मानव हमेशा से एक जिज्ञासु प्रवृत्ति का प्राणी है ।वह कुछ न कुछ अनूठा करने की लालसा रखता है ।जब से मानव ने अपनी बातों को संप्रेषित करने की जरूरत महसूस की,उसी दिन से अपनी बात व विचार,प्रतिक्रिया को मंच प्रदान करने के लिए साधन ढूँढने की कोशिश में जुट गया और उसी का परिणाम है कि हम-सब के बीच एक लिखित समाचार पत्र के रूप में अखब़ार आया ।हम अखब़ार की कीमत क्या होती है,एक देश,समाज,संस्था,संगठन,उद्योग,व्यापार व अन्य क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के लिए,इस बात की जानकारी के लिए हमें अखब़ारों के इतिहास व इससे संबंधित अन्य जानकारियों के लिए निम्नलिखित बात आपके सम्मुख प्रस्तुत है:-
इतिहास:---भारत में समाचार पत्रों का
******* इतिहास--यूरोपीय लोगों के भारत में प्रवेश करने के साथ ही प्रारंभ होता है ।भारत में प्रथम अन्ग्रेजी का अखब़ार ''द बंगाल गैजेट '
को 29जनवरी,1780 में ब्रिटिश राज के तहत जेम्स अगस्टस हिक्की द्वारा प्रकाशित किया गया था ।इसमें कम्पनी सरकार की आलोचना की गई थी जिस कारण उसका प्रेस जब्त कर लिया गया ।
सर्वप्रथम भारत में प्रिंटिंग प्रेस लाने का श्रेय पुर्तगालियों को दिया जाता है ।1557 ईस्वी में गोवा के कुछ पादरी लोगों ने भारत की पहली पुस्तक छापी ।1684ई0 में 'अन्ग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी 'ने भी भारत की पहली पुस्तक की छपाई की थी ।1684ईस्वी में कम्पनी ने भारत में प्रथम प्रिंटिंग प्रेस (मुद्रणालय)की स्थापना की ।
अन्ग्रेजी अखब़ारों का प्रकाशन भी हुआ जैसे-बंगाल में 'कलकत्ता कैरियर,एशियाटिक मिरर,ओरिएंटल स्टार, मद्रास में-"मद्रास कैरियर,मद्रास गजट,बम्बई में-हेराल्ड,बाम्बे गजट,आदि ।
1818 में ब्रिटिश व्यापारी जेम्स सिल्क बर्किघम ने'कलकत्ता जनरल 'का संपादन किया ।बर्किघम ही वह पहला प्रकाशक था,जिसने प्रेस को जनता के प्रतिबिंब के स्वरूप में प्रस्तुत किया ।प्रेस का आधुनिक रूप जेम्स सिल्क बर्किघम का ही हुआ है ।
**प्रथम हिंदी समाचार पत्र--"उदन्त
"""""""""""""""""""""""""""""""मार्तण्ड "
हिन्दी प्रथम समाचार पत्र था ।इसका प्रकाशन 30 मई,1826ईस्वी में कलकत्ता से एक साप्ताहिक पत्र के रूप में शुरू हुआ था ।आरंभ में आगरकर ने 'केसरी का एवं केलकर ने 'मराठा 'का संपादन किया ।
वैसे समाचार पत्र साप्ताहिक,मासिक एवं छमाही भी होते हैं ।कुछ कम्पनी के बुलेटिन पत्रों के रूप में होते हैं ।अधिकतर समाचार पत्र स्थानीय भाषाओं और स्थानीय विषयों पर केन्द्रित होते हैं ।
समाचार पत्र अथवा अखब़ार--समाज और देश में हो रही घटनाओं,खेलकूद,व्यक्तित्व,राजनीति,विज्ञापन की जानकारीयाँ सस्ते कागज पर छपी होती है ।देश में अखबारी कागज का कारख़ाना नेपानगर(जिला-खण्डवा )म0प्र0 में स्थापित है ।वर्तमान समय में ई-पेपर,ई-पत्रिका आदि के रूप में जारी होते हैं ।
अखब़ार की कीमत क्या होती है उसे सिर्फ उसका पाठक ही जानता है ।बुजुर्गों के लिए अखब़ार टानिक का काम करती है और यह उनके लिए प्राणदायिनी भी है ।एक अखब़ार के संचालन से कितने लोगों का परिवार पलता है ।दो देश के बीच मित्रता व शत्रुता भी करवा सकता है ।एक अखब़ार का समाचार किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को ऊँचा उठाने व नीचा गिरा भी सकता है अर्थात् उसकी छवि धूमिल भी कर सकता है ।किन्तु आज इलेक्ट्रॉनिक्स गजेटस आ जाने से अखब़ार के पाठकों में भारी कमी आई है ।जबकि स्वतंत्रता के आन्दोलन में आन्दोलनकारियों के लिए अखब़ार प्रेरणा और जोश दिलाने में सहायक सिद्ध हुई थी ।फिर भी कितने भी इलेक्ट्रानिक मीडिया व गजेटस आ जायें किन्तु प्रिन्ट् मीडिया के रूप में अखब़ारों की एक अलग अहमियत है ।जनचेतना को जगाने में अखब़ार की कीमत क्या होती है,दूर-दराज के रहने वाले ही जानते हैं ।उच्च शिक्षा के शोधकर्ताओं के लिए अखब़ारों,मासिक पत्रिका,जर्नल की कीमत भलीभांति जानते हैं ।
अतःअन्त में यही कहना चाहता हूँ कि अखबार की कीमत उसमें छपने वाले समाचार और संपादक की कौशलता,विद्वता के ऊपर निर्भर करता है ।अतःसभी से अपील है कि अखब़ार की कीमत को कभी भी कम मत होने देना और एक सुधि पाठक की तरह हमेशा जुड़कर रहें ।
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