Wednesday, February 10, 2021

संतराम कुम्हार की रचना- बेरोजगारी

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
    विषय - बेरोजगारी 
     विधा - छंदमुक्त कविता 
   शीर्षक - " मैं बेरोजगार हूँ "
--------------------------------

अपने घर का मैं कर्णधार हूँ।
सुनो! मैं बेरोजगार हूँ। 
गाँव-गली शहरों में मैं शुमार हूँ। 
सुनो! मैं बेरोजगार हूँ।। 

पिता की कठिन परिश्रम से, 
काॅलेज में दाखिला ले पाया था। 
मेरे लिए मेरे माता-पिता ने, 
बिना सब्जी,भोजन भी खाया था।। 
घरवालों का मैं कर्जदार हूँ। 
सुनो! मैं अभी भी बेरोजगार हूँ।।

डिग्रियाँ उच्च लेकर भी मैंने,
दर-दर की ठोकरें खायी है। 
कुछ अंक की कमी के कारण, 
नौकरी हाथ से गंवाई है।। 
रोजगार की तलाश में भटकता अखबार हूँ। 
सुनो! मैं अभी भी बेरोजगार हूँ।।

स्वर्णिम भविष्य के सपने, 
मैंने भी कभी देखे थे। 
काली परछाई की काली साया, 
अब तक क्यों अनदेखे थे।। 
क्या मैं, खुद ही खुद का गुनेहगार हूँ। 
सुनो! मैं अभी भी बेरोजगार हूँ।। 

झूठे वादे सरकारों की हर वर्ष,
सुन रहा ये कान है।
रोजगार ही एक शिक्षित इंसान का, 
असली सम्मान है।। 
कुछ कमाने का मैं भी तो हकदार हूँ। 
सुनो! मैं फिर भी बेरोजगार हूँ।।

हमें हमारा हिस्सा चाहिए। 
भहकावे वाली न कोई किस्सा चाहिए। 
इंसाफ करो हमारा राजनीति करने वालों,
रोजगार की है तलब, न कि भिक्षा चाहिए। 
युवाओं की आवाज़ मैं असरदार हूँ। 
सुनो! मैं अभी भी बेरोजगार हूँ।।

------------****----------------

मौलिक रचना ( स्वरचित ) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...