Wednesday, February 3, 2021

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- इम्तिहान

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - इम्तिहान
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - पल - पल का इम्तिहान
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   // पल - पल का इम्तिहान //

पल - पल का इम्तिहान है ।
सृष्टि का संविधान है ।।
            कौन भला बच पाया है ?
            रब की कैसी माया है ??
जिसको आगे बढ़ना है ।
जीवन मे चमकना है ।।
            प्रतिभा हुनर दिखाना है ।
            जग में नाम कमाना है ।।
इम्तिहान को पार करो ।
स्वयं में सतत सुधार करो ।।
          सर्वत्र कसौटी का परिवेश ।
          सामान्य नही कुछ करो विशेष ।।
जाँचे - परखे बिना कोई ।
तुच्छ बेकार समझते सोई ।।
          मूल्यवान जब बनना है ।
          मूल्यांकन से गुजरना है ।।
डर के आगे जीत है यारों ।
इम्तिहान का भूत उतारो ।।
          ऐसे ढंग से काम करो जी ।
          निज को मत बदनाम करो जी ।।
हर एक परीक्षा पास करो ।
नही तो फिर से प्रयास करो ।।
         यही सफलता की कुंजी है ।
         मेहनत की दुर्लभ पूँजी है ।।
इम्तिहान से होती पहचान ।
कौन कितने लायक इंसान ??
           पीतल है या खरा सोना ।
           कोयला से हीरा होना ।।
अनगढ़ पत्थर से देव मूर्ति ।
साधारण मानव से संत सती ।।
           इम्तिहान से लाभ ही लाभ ।
           जिनका कोई नहीं हिसाब ।।

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