जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - इम्तिहान
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - पल - पल का इम्तिहान
*************************
// पल - पल का इम्तिहान //
पल - पल का इम्तिहान है ।
सृष्टि का संविधान है ।।
कौन भला बच पाया है ?
रब की कैसी माया है ??
जिसको आगे बढ़ना है ।
जीवन मे चमकना है ।।
प्रतिभा हुनर दिखाना है ।
जग में नाम कमाना है ।।
इम्तिहान को पार करो ।
स्वयं में सतत सुधार करो ।।
सर्वत्र कसौटी का परिवेश ।
सामान्य नही कुछ करो विशेष ।।
जाँचे - परखे बिना कोई ।
तुच्छ बेकार समझते सोई ।।
मूल्यवान जब बनना है ।
मूल्यांकन से गुजरना है ।।
डर के आगे जीत है यारों ।
इम्तिहान का भूत उतारो ।।
ऐसे ढंग से काम करो जी ।
निज को मत बदनाम करो जी ।।
हर एक परीक्षा पास करो ।
नही तो फिर से प्रयास करो ।।
यही सफलता की कुंजी है ।
मेहनत की दुर्लभ पूँजी है ।।
इम्तिहान से होती पहचान ।
कौन कितने लायक इंसान ??
पीतल है या खरा सोना ।
कोयला से हीरा होना ।।
अनगढ़ पत्थर से देव मूर्ति ।
साधारण मानव से संत सती ।।
इम्तिहान से लाभ ही लाभ ।
जिनका कोई नहीं हिसाब ।।
---#---#---#---
No comments:
Post a Comment