Friday, February 19, 2021

संतराम कुम्हार की रचना- खिलौने वाला

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
    विषय - खिलौना
     विधा - छंदमुक्त कविता 
   शीर्षक - " खिलौने वाला "
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खिलौने वाला देखो आ रहा है। 
बच्चों की खुशियाँ साथ ला रहा है। 
गली-गली आवाज लगा रहा है।
डमरु अपनी बजा जा रहा है।।

हाथी,घोड़ा,रेलगाड़ी और हवाईजहाज़ है। 
मोबाइल भी करता छइंया-छइंया आवाज है।
भालू,हिरण,शेर साथ अपने ला रहा है। 
खिलौने वाला देखो आ रहा है।

याद है सबको ओ प्यारा बचपन।
खिलौने बिन नहीं लगता था जब मन।
ओ बचपन फिर याद आ रहा है।
खिलौने वाला देखो आ रहा है।।

रोते थे लेने को जिद करते थे।
बिन खिलौने एक पल भी नहीं रहते थे।
ओ आँसू,आँखें फिर गिरा रहा है।
खिलौने वाला देखो आ रहा है।।

बहनें नाराज हो जाती थी। 
अच्छी खिलौने जब माँ मेरे लिए ले आती थी। 
भाई, बहना को अपनी मना रहा है। 
खिलौने वाला देखो आ रहा है।।

खिलौनों का खेल कितना सुहाना था। 
बड़ी हसीन ओ लड़कपन का जमाना था। 
अब बच्चों को मोबाइल सिर्फ भा रहा है। 
खिलौने वाला देखो आ रहा है।।

खिलौने बेचकर खिलौने वाला,
बच्चों को खाना खिलातें है।
हम खरीदकर खिलौने को,
बच्चों को खुशियाँ दिलाते हैं।
रीत दुनिया की समझ मुझे नहीं आ रहा है।
खिलौने वाला देखो अब जा रहा है।।

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मौलिक रचना ( स्वरचित ) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

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