स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक -"खिलौना"
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खिलौनों से संबंध है गहरा
जब खुशखबरी घर आये
पिता खिलौने घर ले आये
माता बड़े प्यार से सजाये ।
देख खिलौने चेहरे खिलते
बच्चे हों या हों बूढ़े
हाथी-घोड़े या कुत्ते-बिल्ली
जब बच्चों को हैं मिलते ।
नाना प्रकार के खिलौने
बच्चों के मन को हरते
जब बच्चों को हम देते
रोती सूरत भी मुस्कान बिखेरते ।
खिलौना कहीं खो गया
मोबाइल का जमाना हो गया
नाना ऐप नाना प्रकार के प्रोग्राम
बच्चों के शरीर हो रहे जाम।
मोबाइल देखें,आंख गड़ाये
माना आइक्यू लेवल बढ़ाये
पर भविष्य कैसा होगा
जब शरीर ही पंगु हो जाये ।
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