जिला :- महासमुंद
विषय :- खिलौना
विधा :- छंद मुक्त कविता
शीर्षक :- हम सब केवल खिलौने हैं।
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खिलाड़ी है वह ऊपर वाला,
हम सब केवल खिलौने हैं।
कुछ की ऊंची शख्शियत है,
कुछ जरा से बौने हैं।
मिट्टी की यह काया अपनी,
इक दिन मिट्टी हो जाएगा।
भाग दौड़ है बस कुछ दिन का,
फिर मनवा सो जाएगा।
उसके कहने पर करतब करते,
हम बंदर वो मदारी है।
हमको कुछ ना आता यारा,
सब उसकी कलाकारी है।
हैं हम कठपुतली उसके,
है डोरी उसके हाथों में।
छूटा सहारा गर उसका तो,
जान नहीं फिर बांहों में।
खिलाड़ी है वह ऊपर वाला,
हम सब केवल खिलौने हैं।
कुछ की ऊंची शख्शियत है,
कुछ जरा से बौने हैं।
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